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प्लास्टिक PLASTIC के बोतल पर दिए गए कोड 1234567 को नजरंदाज ना करें, हो सकते हैं ये नुकसान |

प्लास्टिक के नुकसान के बारे में आज इन्टरनेट पर हजारों आर्टिकल्स लिखे हुए मिल जायेंगे | यूट्यूब पर बहुत से ऐसे विडियो मिल जायेंगे, जिनमे प्लास्टिक से होने वाले नुकसान को बताया जाता है | आज दुनिया भर की सरकारों और पर्यावरण सेवी संस्थानों के लिए प्लास्टिक का मुद्दा सिर दर्द बना हुआ है | जगह जगह कैंपेन और कार्यक्रम चला कर लोगों में जागरूकता फैलाने का प्रयास किया जा रहा है, की प्लास्टिक का प्रयोग पर्यावरण और भविष्य में मानव जीवन के लिए घातक होने वाला है| प्लास्टिक के उपयोग से बहुत तरह की बीमारियाँ और स्वास्थ्य विक्रुतिया पैदा ले रही हैं |

आज हम इन्सान प्लास्टिक के इतने आदि हो चुके हैं की, बिना प्लास्टिक के हमारा कोई भी दैनिक कार्य सोचना भी मुश्किल लगता है | सब्जी मार्केट, मीट मार्केट, ग्रोसरी स्टोर और शॉपिंग मॉल कही भी हमें किसी ना किसी रूप में प्लास्टिक का सामना करना पड़ता है, चाहें वह पानी की बोतल हो या फिर प्लास्टिक के झोले या राप्पर्स , चाहें सब्जी का थैला हो या फिर कोल्ड-ड्रिंक की बोतल, चाहें शैम्पू की बोतल हो या फिर पिकल्स की जार हर जगह हम प्लास्टिक को लेकर यूज़ टू हो चुके हैं|

आज हम डब्बा बंद फ़ूड, पानी, लंच बॉक्स और प्लास्टिक पैक्ड अन्य खाने की सामग्री आदि, का इस्तेमाल धड़ल्ले से करते जा रहे है | जिससे तरह-तरह की बीमारियाँ हमें अपना शिकार बना रही हैं | प्लास्टिक में BPA या विस्फेनोल जैसी विषाक्त होता है, जो हमारे शरीर में पहुच कर बहुत से रोग पैदा करता है | जैसे – कैंसर, गुर्दे की बीमारी, तंत्रिकातंत्र और मष्तिस्क को नुकसान, दमा और फेफड़ों का कैंसर आदि | एक रिसर्च में सामने आया है की प्लास्टिक BPA और Phthalates मनुष्य के DNA और जीन को भी प्रभावित कर सकता है |

प्लास्टिक के प्रयोग में कमी लाना और उसके के ऊपर अंकित कोड को जानकर कुछ हद तक नुकसान को कम करना |

प्लास्टिक के बोतल और डब्बों के ऊपर ट्रेंगल शेप (त्रिभुजाकार आकृति) में अंकित अंको के आधार पर पता लगाया जा सकता है की, प्लास्टिक में पैक फ़ूड या पेय खाने योग्य है या प्लास्टिक का बोतल कितने दिन तक यूजेबल है | जिससे प्लास्टिक से होने वाले स्वास्थ्य नुकसान को कुछ हद तक कम किया जा सकता है |

डब्बों पर अंकित कोड्स बताते हैं अवधि और नुकसान |

प्लास्टिक के डब्बों और उससे बने हुए वस्तुओ पर अंकित नुमेरिकल कोड्स से होने वाले नुकसान और उसकी खराब होने की समय अवधि के बारे में पता लगाया जा सकता है | अक्सर हम पानी के बोतल या अन्य तरह के डब्बे, बोतल, कंटेनर और प्लास्टिक से बने वस्तुओं पर बने एक त्रिभुजाकार आकृति में एक अंक देखते है लेकिन उसे ध्यान नहीं देते | वह अंक उस बोतल या डब्बे की केटेगरी को बताता है | ये अंक 1 से 7 तक सिंगल डिजिट में होते हैं जैसे – 1,2,3,4,5,6,7 |

प्लास्टिक से बने बोतल या डब्बों पर अंकित कोड |

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कोड – 1

इसे PET या Polythylene Terephalate कहा जाता है, आमतौर पर इसका उपयोग पानी के बोतल, कोल्ड ड्रिंक बोतल या पेय पदार्थों में प्रयोग होने वाले बोतलों में किया जाता है | इसका प्रयोग अधिक समय तक करना हानिकारक होता है | इसमें अधिक समय तक कोई लिक्विड रखा जाता है तो इसमें से एंटीमनी नामक पदार्थ रिसने लगता है, जो स्वास्थ्य के लिए हानिकारक होता है | खासकर तब जब इसे गर्म किया जाये या बंद जगह पर स्टोर किया जाये |

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कोड – 2

इसको HDPE या High Density Polyethylene कहा जाता है | इसे बनाना आसान और कम खर्च वाला होता है | इसका प्रयोग दूध, पानी के पाउच, जूस और ग्रोसरी बैग आदि के लिए किया जाता है | इसे यदि अधिक समय के लिए स्टोर किया जाये या सूर्य की रोशनी में रखा जाये तो इसमें से नोनिलफेनोल नामक पदार्थ रिसने लगता है, जो नुकसानदेह होता है | इससे हार्मोनल समस्या पैदा होने का खतरा बना रहता है |

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कोड – 3

ये PVC या Polyvinyl Chloride नाम से जाना जाता है | इसका प्रयोग PVC पाइप, खिलौनों, शैम्पू के डब्बों, खिड़की दरवाजों और बड़े हैवी कंटेनर बनाने के लिए किया जाता है | ये काफी हार्ड और रफ़ होता है | इसका प्रयोग खाने के वस्तुओं के लिए नहीं किया जा सकता, क्योकि इसे स्वास्थ्य के लिए अधिक नुकसानदेह माना गया है | इसके प्रयोग से फाथेलेट्स नामक हार्मोनल समस्या पैदा होने की संभावना अधिक होती है |\

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कोड – 4

आमतौर पर यह LDPE (Low Density Polyethylene) के नाम से जाना जाता है | यह अधिक पतला और फ्लेक्सिबल होता है, जिसके कारन इसे दवाइयों, ब्रेड्स और ग्रोसरी आइटम्स में प्रयोग किया जाता है | इस कोड को और कोड्स के अपेक्षा सुरक्षित माना गया है, क्योकि यह नॉन-रीसायकल होता है | लेकिन इसका भी अधिक समय तक प्रयोग हो या सूर्य के रोशनी के संपर्क में आये तब इसमें से नोनिलफेनोल नामक पदार्थ रिसने लगता है, जो स्वास्थ्य के लिए हानिकारक होता है |

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कोड – 5

विज्ञान के भाषा में इसे PP (Polypropylene) के नाम से जाना जाता है | ये भी बाकि कोड के मुकाबले थोडा सुरक्षित माना गया है | इस का प्रयोग पानी के बोतल, आचार के जार, दवा के कंटेनर, जूस के कंटेनर, दही के कप और केचप पैकेट आदि के लिए किया जाता है | इसमें गर्म लिक्विड को डालने से भी नुकसान नहीं होता है, इसीलिए इसे सेफ केटेगरी में रखा गया है | इसको रीसायकल भी किया जा सकता है | लेकिन ध्यान देने वाली बात यह भी है, की इसमें मादक पेय पदार्थों को रखा जाता है तो विपरीत और गंभीर परिणाम हो सकता है|

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कोड – 6

यह PS या Polystyrene Styrofoam के नाम से जाना जाता है, इससे एक बार प्रयोग किये जाने वाले डिस्पोजल, थाली, प्लेट्स, अंडे के कार्टून्स और हेलमेट आदि बनाये जाते है| इसका प्रयोग अधिकतर काले रंग के पैकेट के रूप में किया जाया है, जिसे ज्यादातर मीट और फलों के दुकानों पर देखा जा सकता है | यह सबसे खतरनाक केटेगरी में रखा गया है और यह कैंसर जैसे रोगों का कारक माना गया है | इसे भूल कर भी गर्म नहीं करना चाहिए, क्योकि इससे स्टेरिन नामक रसायन का रिसाव होने लगता है, जो सेहत के लिए अधिक खतरनाक होता है |

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कोड – 7

PS या Polycarbonate सबसे हानिकारक वर्ग में रखा गया है | इसका प्रयोग खाद्य वस्तुओं के लिए नहीं करना चाहिए | ये विस्फेनोल (BPA) जैसी हानिकारक विषाक्त को अपने में संजोये रहता है, जो की कैंसर जैसे बिमारियों की संभावना को बढ़ा देता है | कभी कभी पहचान के लिए कोड के अलावा इससे बने वस्तुओं पर PS लिखा हुआ पाया जाता है |

प्लास्टिक पर अंकित कोड को दो भागों में बाटें |

वस्तुओं पर अंकित कोड को याद रखने के लिए सबसे आसान तरीका है की अंकों को एकत्र करके एक संख्या का निर्माण करले और उसे हमेसा याद रखें | जैसे फूड्स और पेय पदार्थों के लिए सुरक्षित कोड – 1245, और फूड्स और पेय पदार्थों के लिए असुरक्षित कोड – 367

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